slide3-bg



अहंकार को समझिए फुटबॉल - पूज्य श्री चन्द्रप्रभ


1. प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए व्यवहार में विनम्रता अपनाइए और बोली में मधुरता। विनम्रता दूध का काम करेगी तो मधुरता शरबत का।

2. नम्रता को जीवन में जीने के लिए तीन मंत्र अपनाइए - 1. कड़वी बात का मिठास से जवाब दीजिए, 2. क्रोध आने पर चुप रहिए और 3. अपराधी को दंड देते समय भी मानवीय कोमलता अवश्य रखिए।

3. इस नसीहत को सदा याद रखिए - कम खाइए, गम खाइए और नम जाइए। नगीने आखिर उसी सोने में ही लगा करते हैं जो नम्र होता है।

4. झुकता वही है जिसमें कुछ जान है, अकड़पन तो मुर्दे की पहचान है। अधिक दानों वाले पौधे ज्यादा झुकते हैं, भूसे वाले अकड़े हुए खड़े रहते हैं। हम उस वृक्ष की तरह बनें जो जैसे-जैसे फलों से लदता है नमता चला जाता है। उस काठ की तरह न बनें जो टूट तो सकता है, पर नम नहीं सकता।

5. मित्रों को नमस्कार करने की आदत डालिए और अपने से बड़ों के चरण स्पर्श करने की। अभिवादन के बदले अभिवादन मिलता है और प्रणाम के बदले आशीर्वाद। बड़ों के आशीर्वाद यदि जीवन का धन है तो सोचिए कि आप अब तक यह धन कितना बटोर पाए हैं।

6. नमस्कार अहंकार का समाधान है। रावण यदि अहंकार का प्रतीक है तो राम नम्रता के । जीवन में यदि लघुता और नम्रता रखेंगे तो यह कहावत स्वतरू आप पर चरितार्थ हो जाएगी - लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूर। कीड़ी शक्कर ले चली, हाथी के सिर धूर।।

7. अहंकार को सोडावाटर की शीशी की गोली समझिए जो दूसरों की विशेषताओं को आपके अंदर नहीं जाने देती और आपकी विशेषताओं को अंदर से बाहर नहीं आने देती।

8. अहंकार में हम फूल तो सकते हैं, पर फैल नहीं सकते। अहंकारी तो फुटबाल की गेंद की तरह होता है जिसमें हवा भर जाने पर लोगों के पाँवों के जूते ही खाती है।

9. जीवन में अहंकार किस बात का? आसमान को देखो तो सोचो कि हम आसमान से ऊपर नहीं उठ सकते और जमीन को देखो तो सोचो कि घमंड किस बात का, आखिर सबको इसी मिट्टी में पलीत होना है। आखिर सबकी नाव समुद्र में है, न जाने किस क्षण क्या हो जाए?

10. यह व्यर्थ का गरूर है कि मुर्गा समझता है कि उसने अंडा देकर किसी नक्षत्र को जन्म दिया है और बैलगाड़ी के नीचे चलने वाला कुत्ता समझता है कि उसी के कारण गाड़ी चल रही है। भाई, जीवन में झुकना सीखिए, हमारी तो औकात ही क्या है बड़े-बड़े महल खंडहर हुए हैं और बड़े-बड़े राजा-महाराजा चला-चली के खेल के हिस्से बने हैं।




गुरुदेव श्री

श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. :- विचार और व्याख्यान


Our Lifestyle

Features