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महिला दिवस पर लें बहन और बेटियों को बचाने का संकल्प - संत चन्द्रप्रभ


नारी का सम्मान साक्षात महालक्ष्मी का सम्मान है। लक्ष्मीजी के फोटो की पूजा करना और घर में बैठी साक्षात लक्ष्मी का अपमान करना कौन-सा धर्म है? अगर आप लाइफ को सुखी रखना चाहते हैं तो पहले वाइफ को सुखी रखिए। उन्होंने कहा कि अगर हम धरती पर रहने वाली नारी का सम्मान करना शुरू कर देंगे तो ऊपर वाली लक्ष्मी अपने आप बरसनी शुरू हो जाएगी। आज नारी को पूजने की कम उसे पुरुषों के बराबर का हक देने की जरूरत ज्यादा है। वह देवी है या नहीं, पर इंसान जरूर है इसलिए नारी को भी नर जितना सम्मान मिलना आवश्यक है।

इंसान मंदिर में तो सीता की मूर्ति की पूजा करता है, पर क्या सड़क चलती नारी में सीता को देख पाता है? हम सीता, सरस्वती, लक्ष्मी, दूर्गा की पूजा बाद में करें, पहले हमारे आस-पास रहने वाली नारी में देवीय स्वरूप को देखना शुरू करें तभी हमारी मंदिर में की जाने वाली पूजा सार्थक हो पाएगी।

महिला दिवस पर हम बहिनों और बेटियों की रक्षा का संकल्प लें। हम एक हाथ में माला रखें तो दूसरे हाथ में भाला। माला आत्मकल्याण के लिए और भाला बहिन-बेटियों की रक्षा के लिए। नारियाँ सीता बनकर रहे, पर काम पड़े तो दुर्गा बनने में भी पीछे न रहे। हम बहिनों के साथ उनकी कोख में पल रही बेटियों को भी बचाएं। भ्रूणहत्या केवल भ्रूण की नहीं, माँ की, बहिन की, बेटी की और पत्नी की हत्या के बराबर है। भ्रूणहत्या का पाप करने वाला परिवार कभी सुखी नहीं रह सकता। जीवन में होने वाली आकस्मिक बुरी घटनाएं इसी पाप का परिणाम है। अगर बड़ी उम्र में भी कोई महिला गर्भवती हो जाए तो समाज के डर से भ्रूणहत्या न करवाए। उसे जन्म दे, आपको ईश्वर के असीम आशीर्वाद मिलेंगे। अगर धार्मिक परिवार के लोग भी भ्रूणहत्या जैसा घिनोना पाप करते हैं तो उनका धर्म-कर्म बेकार है। बेटियों के जन्म पर थाली बजाए। बेटियाँ अभिशाप नहीं प्रभु का आशीर्वाद है। हर भाई के एक छोटी और एक बड़ी बहिन अवश्य होनी चाहिए। बड़ी बहिन से वह माँ की तरह प्यार पा सके और छोटी बहिन पर वह अपना स्नेह लुटा सके। घर में न केवल पुत्र के रूप में लक्ष्मण का जन्म हो बल्कि लक्ष्मी के रूप में कन्या का भी जन्म होना चाहिए।




गुरुदेव श्री

श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. :- विचार और व्याख्यान


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