slide3-bg



हर नववर्ष को बनाएँ शांति, शक्ति और प्रगति का वर्ष - संत चन्द्रप्रभ


सोचिए, आपने बीते वर्ष की शुरुआत जिन संकल्पों के साथ की थी, क्या आप उन्हें पूरा करने में सफल हुए? यदि हाँ, तो आप तारों में पूनम के चाँद हैं, पर यदि 70 प्रतिशत ही संकल्पों को पूरा कर पाए तो आप सरोवर में खिले हुए कमल हैं। यदि आप 50 प्रतिशत सफल हुए तो आप काँटों में भी खिले हुए गुलाब हैं, पर यदि आप ढाई संकल्प भी पूरे न कर पाए, तो आपका मन शेखचिल्ली के अलावा कुछ भी नहीं है। कृपया अपने कमजोर मन को नववर्ष की पहली किरण पाते ही विश्वास, प्रार्थना और सफलता की आध्यात्मिक ऊर्जा से भर लीजिए।

नववर्ष को शांति, शक्ति और प्रगति का वर्ष बनाइए। मन में यदि किसी के प्रति खार हो तो उसे गड़े हुए काँटे की तरह दिल से निकाल फेंकिए। भला, जब बीते वर्ष का कैलेंडर आप अपनी दीवार से उतार चुके हैं तो फिर दिल में पुराने खार का बुखार क्यों ढोया जाए?

जितने सच्चे दिल से आपने नववर्ष की सफलता की प्रार्थना की है, वर्षभर अपने हर दिल की शुरुआत भी ऐसे ही प्रसन्न हृदय और ईश्वरीय प्रार्थना से करते रहें, ताकि वर्ष का पहला दिन ही नहीं, आखिरी दिन भी ऊर्जा, उत्साह और उमंग से भरा हुआ हो।

पुण्याई में छिपा है समृद्धि और सफलता का राज-इंसान केवल मेहनत से नहीं कमाता। पुण्य प्रबल हों तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। पुण्य की पूँजी कमजोर पड़ जाए तो सोना भी दगा दे जाता है। पुण्य चाहिए तो भलाई कीजिए और नियत साफ रखिए। दस रुपये और एक मुऋी आटा ही सही, दीन दुखीजनों की मदद के लिए अवश्य उपयोग कीजिए। जो दूसरों के लिए उपयोगी बनते हैं वे ही कभी योगी बनते हैं।

जिस घर में गुरुजनों, संतजनों और अतिथिजनों का आदर और आतिथ्य होता है, उस घर की तो माटी भी मंदिर के चंदन की तरह सिर पर लगाने योग्य होती है।

गुस्सा छोड़ें, प्रेम से जिएँ-गुस्सा छोड़कर प्रेम का पथ अपनाएँ। क्रोध तो लुहार का हथौड़ा है जिसकी चोट तो एक होती है, पर टुकड़े दो होते हैं। हम सुनार की हथौड़ी बनें जो ठोकापीटी कर सोने का कंगन और माथे का मुकुट बनाती है। उन्होंने कहा कि नववर्ष पर अपना खानपान सुधारिए आपका शरीर स्वतरू सुधर जाएगा, मस्त रहिए मन सुधर जाएगा, आधा घंटा ही सही भजन अवश्य कीजिए आपका भव-भव सुधर जाएगा।




गुरुदेव श्री

श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. :- विचार और व्याख्यान


Our Lifestyle

Features