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खुद को हिन्दू, जैन या मुसलमान कहने से पहले कहें भारतीय - संत चन्द्रप्रभ


भारत में खुद को हिन्दू, जैन, मुस्लिम, सिख इत्यादि कहने वाले तो करोड़ों लोग है, पर खुद को भारतीय कहने वाले लोग गिनती के ही हैं। जिस दिन हमें खुद के भारतीय होने का गर्व महसूस होगा समझना उसी दिन भारत में सच्चा गणतंत्र दिवस है। हिन्दू वेद को, मुसलमान कुरआन को, जैन जिनसूत्र को अपना शास्त्र मानते हैं, पर मैं हिन्दू, जैन या मुसलमान बाद मैं हूँ, पहले भारतीय हूँ और भारत का संविधान ही मेरे लिए पहला शास्त्र है। जिस दिन हम भारत के संविधान को अपना शास्त्र समझेंगे और इसके नियमों का पालन करने को अपना धर्म, तब समझना भारत में फिर से किसी राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, मौहम्मद या जीसस का जन्म हो चुका है। हमारे दिल में जितना सम्मान धर्म के प्रति है उससे हजार गुना सम्मान राष्ट्र के प्रति होना चाहिए। याद रखें, मातृभूमि पर गौरव करना स्वयं अपनी माँ पर गौरव करने जैसा है।

भारत कोई भूमि का टुकड़ा या भूगोल का नक्शा नहीं है वरन् भारत एक जीवन दर्शन है, जीवंत संस्कृति है, वसुधैव कुटुम्बकम् और जीयो और जीने दो का अमर संदेश है। अब हमारी पहचान किसी जाति, किसी पंथ या किसी धर्म के आधार पर नहीं वरन् भारतीय के आधार पर होनी चाहिए। हमारा एक ही लक्ष्य हो - मैं अच्छा इंसान बनूँगा। हर अच्छा इंसान अपने आप में जीता-जागता भारत है।

हिन्दू, जैन, मुस्लिम, सिख, ईसाई रूपी नदियों से मिलकर बना भारत महासागर है। ये सारे धर्म ठीक वैसे ही है जैसे बगिया में खिले हुए अलग-अलग तरह के फूल जो बगिया की शोभा को घटाते नहीं वरन् बढ़ाते हैं। हम सभी धर्मों का एवं सभी धर्म के महापुरुषों का सम्मान करना सीखें। जिस दिन मौलवी मस्जिद में राम का नाम लेंगे और पंडित मंदिर में रहमान का, उस दिन सच्चे हिन्दुस्तान का जन्म होगा।

हमारी जीवन शैली सिस्टेमेटिक होनी चाहिए ताकि हम धर्म ही नहीं, वरन् सिस्टम का भी निर्यात कर सकें। हम संकल्प लें कि आज के बाद कचरा इधर-उधर नहीं फेकेंगे, गंदगी नहीं फैलाएँगे। घर की तरह गलियों और मौहल्लों को भी साफ रखेंगे। विदेशों की अनुसरण या आलोचना करने की बजाय उन से भी अच्छाइयाँ सीखेंगे और अपना पॉवर इण्डिया के निर्माण के लगाएंगे।

बुराइयाँ भारत छोड़ो का नारा करें बुलंद : संत ललितप्रभ


भारतवासियों ने प्रगति तो बहुत की है, पर हमारे देश में जीवन-मूल्यों की दुर्गति भी कम नहीं हुई है। जब सबने मिलकर देश-हित के बारे में सोचा तो हमें आजादी मिली,पर जब से हम खुद के बारे में सोचने लगे हैं,तब से हमारे हाथ में देश की बर्बादी आ रही है। आज भ्रष्टाचार बन गया है शिष्टाचार और दुराचार के रूप में आ रहा है गंदी मानसिकता का परिणाम।भारत के लोगों की दो ही कमजोरियाँ हैं - एक चमड़ी और दूसरा दमड़ी। गौरी चमड़ी दिख जाए तो मन डिगने लगता है और दमड़ी दिख जाए तो चरित्र।

अब हम बुराइयाँ भारत छोड़ो का नारा बुलंद करें। अग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बुलंद हुआ तो देश को आजादी मिली अब हम बुराइयाँ भारत छोड़ो का नारा बुलंद करें ताकि देश के हर नागरिक को शांति और समृद्धि का आनंद मिल सके। अगर आपने दूसरे को धोखा दिया तो एक को धोखा देने का पाप लगेगा, किंतु अपने देश को धोखा दिया तो सवा सौ करोड़ लोगों को धोखा देने का पाप लगेगा। भ्रष्टाचार,रिश्वत, स्वार्थ, खुदगर्जी, दुराचार के चलते हमारा देश कलंकित हो चुका है। हम कब तक राम-कृष्ण-महावीर के दुबारा अवतार लेने की प्रतीक्षा करते रहेंगे। हमें भीतर में छिपे भगवान को प्रकट करना होगा और बुराइयों को खड़ेदना होगा।

देश में रामराज्य निर्मित होने की बजाय रामभरोसे देश की गाड़ी चल रही है। आरक्षण के नाम पर प्रतिभाओं का हनन हो रहा है, शिक्षा चरित्र निर्माण और समाज विकास की बजाय अर्थप्रधान हो गई है शिक्षा-चिकित्सा व्यवसाय बन गए हैं, गंदगी के कारण चारों तरफ बीमारियाँ पाँव पसार चुकी है, धन के लिए करोड़ों का माँस निर्यात हो रहा है। काश मांस की बजाय भ्रष्ट नेताओं का निर्यात हो जाए तो भारत बिना कुछ किए अमीर हो जाए। करोड़ों का खर्चा कर नेता चुनाव लड़ व जीत रहे हैं, ऐसा नेता भला सेवा करेंगे या घर भरेंगे? हम भ्रष्ट नेताओं के विरूद्ध आवाज उठाएँ, देश निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाएँ, रिश्वत न देने न लेने का संकल्प लें, प्लास्टिक की थैलियों का भूलचूककर उपयोग न करें, मांस निर्यात नीति का विरोध करें, देश में चल रही गलत नीतियों का विरोध करते हुए मन और चरित्र को सदा पवित्र रखें फिर वो दिन दूर नहीं जब देश का कौना-कौना खुशहाली से लहलहा उठेगा।




गुरुदेव श्री

श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. :- विचार और व्याख्यान


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