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सरकार अच्छी मिले न मिले, पर देश को सिपाही अच्छे मिलने चाहिए - राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ


संत और सिपाही एक-दूसरे के पूरक हैं। संत समाज में संस्कारों का निर्माण करता है और सिपाही समाज को सुरक्षा प्रदान करता है। कभी राम और कृष्ण जैसे महापुरुषों ने भी सिपाही बनकर रावण और कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था ठीक वैसे ही हर सिपाही बुराइयों का संहार करे। देश के हर सिपाही को हनुमान की भूमिका अदा करते हुए दुष्टों का दमन करना चाहिए तो सभ्य लोगों का साथ देना चाहिए।जैसे संत को समाज में सम्मान से देखा जाता है वैसे ही सिपाही भी समाज में वो आदर्श स्थापित करे जिससे उसे भी संतों की तरह ही सम्मान से देखा जाए।

पुलिस शब्द में 3 अक्षर - पुलिस शब्द में 3 अक्षर हैं प, ल व स । प हमें परिश्रम की, ल हमें लगन से कर्तव्य पालन की और स हमें सेवा के लिए प्रेरित करता है। सिपाही शांतिदूत बने, उसका नाम आग लगाने वालों में नहीं, बुझाने वालों में आए और जो काम रुमाल से हो जाए उसके लिए रिवाल्वर का उपयोग न करे।

सरकार भले ही अच्छी मिले न मिले, पर सिपाही अच्छे मिलने चाहिए-देशवासियों को सरकार भले ही अच्छी मिले न मिले, पर सिपाही अच्छे मिलने चाहिए ताकि देश की अच्छी तरक्की हो सके। भले ही हम सूरज बनकर पूरी दुनिया का अंधेरा मिटा नहीं सकते, पर दीपक बनकर आसपास का अंधेरा तो मिटा ही सकते हैं। सिपाही का जीवन आदर्श युक्त होना चाहिए। उसे किसी भी तरह के दुव्र्यसनों का सेवन नहीं करना चाहिए। दुव्र्यसन न करने वाला व्यक्ति ही सिपाही बनने लायक हुआ करता है।

गंदगी करने वालों पर 1100 का चालान- पुलिस के आला अधिकारियों को चाहिए कि वे मोहल्लों में जाकर सफाई कराएँ। इसके बाद सभी को साफ हिदायत दी जाए कि अब यदि मार्ग पर गंदगी मिली तो 1100 रुपये का चालान बनेगा। देश में फैली गंदगी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के सफाए के लिए देश के हर सिपाही और कानून को सख्त हो जाना चाहिए। कई शहरों में हेलमेट अनिवार्य है। हमें देश में ऐसी ही कई अनिवार्यताएँ लागू करनी होंगी। यह सब इच्छा शक्ति से ही हो सकता है।

कर्तव्य-पालन के प्रति सन्नद्ध रहें- हर सिपाही कर्तव्य के प्रति पूर्ण सन्नद्ध रहे। अगर सैनिक नैतिक नियमों और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक हो जाए तो भारतवासी अपने आप ठीक हो जाएँगे।

कद से नहीं, सोच से ऊँचे उठें- व्यक्ति ताड़ासन करके या उछलकूद द्वारा आठ-नौ फुट से ज्यादा ऊँचा नहीं उठ सकता, पर अपनी सोच को ऊपर उठा ले तो वह हिमालय से भी ज्यादा ऊँचा उठ सकता है। हमें जाति और धर्म के भेदभावों को हटाकर स्वयं की भारतीयता और भाईचारे पर ध्यान देना चाहिए।

माँ-बाप को प्रणाम कर जाएँ ड्यूटी पर- सैनिक सुबह उठते ही माता-पिता को प्रणाम करें और उसके बाद ड्यूटी पर जाएँ। यह प्रणाम आपके लिए न केवल रक्षाकवच का काम करेगा वरन् आपकी तरक्की में भी चमत्कारी रोल निभाएगा।

किस्मत की बजाय काबिलियत पर रखें भरोसा - सैनिक किस्मत की बजाय काबिलियत पर भरोसा रखें। किस्मत से कागज हवा में तो उड़ सकता है, पर आसमान जैसी ऊँचाइयों को छूने के लिए पतंग जैसी काबिलियत चाहिए। भले ही हथौड़े की पहली चोट से पत्थर न टूटे और दसवीं चोट में परिणाम आए, इसका मतलब यह नहीं कि नौ चोटें निष्फल गईं। नौवीं चोटों ने प्रयास किया और दसवीं चोट से परिणाम आया। जैसे भाप बनने के लिए पानी का उबलना और दीवार में कील ठोकने के लिए तकिये की बजाय हथौड़ा जरूरी है ठीक वैसे ही भाग्य को खोलने के लिए पुरुषार्थ जरूरी है। जब लोहे का काम करके कोई टाटा और चमड़े का काम करके कोई बाटा बन सकता है तो हम अपनी जिंदगी में आगे क्यों नहीं बढ़ सकते? रिश्वतखोरी से पत्नी को सोने की चूड़ी तो पहना दोगे, लेकिन जब हाथ में लोहे की हथकड़ी पहननी पड़ेगी तो सारी मान-प्रतिष्ठा धूमिल हो जाएगी।




गुरुदेव श्री

श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. :- विचार और व्याख्यान


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