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मान लो तो हार, पर ठान लो तो जीत - संत ललितप्रभ संतों ने शहरवासियों के भीतर भरा जोश, आगे बढने के लिए युवा हुए प्रेरित

बैंगलोर,

15 Jul 2017

राष्ट्र्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि जिंदगी में मान लो तो हार है, पर ठान लो तो जीत है। किस्मत
सत्कर्म से बनती है पर पुरुषार्थ और मेहतन से ही वह खुलती है। हमें पाप कमाई से दूर रहना चाहिए, बाप कमाई का मोह नहीं करना चाहिए और आप कमाई पर हमेशा भरोसा रखना चाहिए। कागज किस्मत से उड़ता है और पतंग काबिलियत से
आसमान तक पहुँचती है। खाली बोरी कभी खड़ी नहीं रह सकती, इसको खड़ा करने के लिए इसमें कुछ न कुछ भरना पड़ता है। हमारी जिंदगी भी ऐसी ही है। इसमें निरंतर प्रयास, आत्म-विश्वास और महान लक्ष्य के तत्त्व को भरना पड़ेगा,
तभी हम आगे बढ़ पायेंगे। संत ललितप्रभ शनिवार को मराठा हॉस्टल मैदान में सफलता सप्ताह के छठे दिन
कैसे चमकाएँ अपने भाग्य के सितारे विषय पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दो अक्षर का लक, ढाई अक्षर का भाग्य, तीन अक्षर का नसीब और साढ़े तीन अक्षर का किस्मत तभी परिणाम देता है जब उसके साथ चार अक्षर
का शब्द मेहनत जुड़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस दुनिया में दस प्रतिशत लोग ही अपने साथ किस्मत लेकर आते हैं, नब्बे प्रतिशत लोगों को तो पुरुषार्थ करके अपनी किस्मत को जगाना पड़ता है। हम भाग्य के भरोसे न बैठे रहें, दुर्भाग्य के अंधेरे को कोसने की बजाय मेहनत की मोमबत्ती जलाएँ। अगर कर्मफूटा आदमी भी भरपूर कर्मयोग करना शुरू कर दे तो वह किस्मत के बंद तालों को खोल सकता है। संतप्रवर ने महिलाओं से कहा कि वे हाथों का उपयोग मेहंदी लगाने के लिए नहीं वरन् मेहनत करने के लिए करे। मेहंदी का रंग तो सात दिन में उतर जाएगा, पर मेहनत का रंग जिदंगी भर रंग देता रहेगा। उन्होंने कहा कि आज
दुनिया में जितने भी शिखर पर पहुँचे हुए लोग हैं उनमें से सत्तर प्रतिशत लोग गरीब, कमजोर और फटेहाल तबके से थे, पर उन्होंने भाग्य के भरोसे रहना कबूल न किया, खुद का निर्माण किया, खुद को आगे बढ़ाया और मेहनत के बलबूते सफलता के झंडे गाड़े।

सफलता का पहला सूत्र है रू मेहनत-संतप्रवर ने कहा कि सफलता का पहला सूत्र मेहनत है। याद रखें, गुनगुना पानी कभी भाप नहीं बनता। भाप बनने के लिए पानी को खोलना पड़ेगा तभी वह आकाश तक पहुँच पाएगा ठीक वैसे ही गुनगुने प्रयास से हम आगे नहीं बढ़ सकते। जब अंधी, गूंगी और बहरी बच्ची मेहनत करके दुनिया की महान लेखिका हेलन केलर बन सकती है तो हमें तो भगवान ने सब कुछ दिया है, फिर हम कुछ क्यों नहीं बन सकते। उन्होंने भाग्य को कमजोर करने वाले वाक्यों को जीवन से हटाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि श्मेरा तो भाग्य ही खराब है, मुझसे कुछ नहीं होगा, मैं जिंदगी में कुछ बन नहीं
सकता, अभी मेरा मूड नहीं है जैसे वाक्यों को जिंदगी से सदा के लिए हटा दें। चुटकी लेते हुए संतप्रवर ने कहा कि अगर आपके पीछे कुत्ता काटने के लिए दौड़े तो क्या आप उस समय भी यही कहेंगे कि अभी तो मेरा दौडने का मूड नहीं है।

स्वयं को कम और कमजोर न समझें-संतप्रवर ने कहा कि धरती पर जितने भी लोग हैं सबको भगवान ने समान योग्यताएँ देकर भेजा है, फर्क केवल उन योग्यताओं का उपयोग करने न करने का है। इसलिए स्वयं को कभी भी कम और कमजोर न समझें।
पिछले 2500 वर्षों तक महिलाएँ पुरुषों के पीछे-पीछे चली, पर जब से उन्हें आगे बढने का मौका मिला है वे भी कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों का साथ दे रही हैं। उन्होंने बहिनों से कहा कि वे भी आगे बढ़ें और अपनी बेटियों में भी आगे बढने का हौंसला जगाएँ ताकि उन्हें हर महिने अपने पतियों के आगे हाथ न फैलाना पड़े।

ऐसे चमकाएँ अपने भाग्य के सितारे-भाग्य के सितारे चमकाने के टिप्स देते हुए संतप्रवर ने कहा कि जिंदगी का कोई न कोई लक्ष्य जरूर बनाएँ, लक्ष्य को पाने की योजना बनाएँ, योजना के अनुरूप निरंतर प्रयास करें और आत्मविश्वास के साथ तब तक लगे रहें जब तक वह हासिल न हो जाए। याद रखें, बिना लक्ष्य की जिंदगी कार के पीछे दोडने वाले कुत्ते जैसी हुआ करती है
जो दौड़ तो खूब लगाता है, पर प्राप्त कुछ नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि छोटा काम करने में संकोच न खाएँ वरन् खोटा काम करने से बचें। गलत तरीकों से धन न कमाएँ। दया के दूध से मेहनत का पानी ज्यादा अच्छा होता है। समारोह से पूर्व लाभार्थी परिवार पन्नालालजी गोतमचंद जी कवाड, महेन्द्रकुमार, ललितकुमारा रांका, विजेन्द्र टाक, लोकेश टाक, सुरेश बाफना
ने दीपप्रज्वलन कर किया। टाक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजेन्द्र टाक परिवार के द्वारा सभी श्रद्धालुओं को क्या स्वाद है जिंदगी का ग्रन्थ प्रदान किया गया।


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