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रोज करेंगे योग, तो सदा रहेंगे निरोग - संत चन्द्रप्रभ मराठा हॉस्टल मैदान में हजारों लोगों ने एक साथ किया योग और प्राणायाम का अभ्यास

बैंगलोर

22 Jul 2017

मराठा हॉस्टल मैदान में चल रहे सत्संग महाकुंभ के इक्कीसवें दिन राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ महाराज, महोपाध्याय ललितप्रभ सागर
महाराज एवं डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के सान्निध्य में विराट योग सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीस कौम के पाँच हजार से अधिक भाई-बहिनों ने एक साथ भाग लेकर योग का विशेष प्रशिक्षण लिया। इस अवसर पर
जब संत चन्द्रप्रभ ने सक्रिय योग के पॉवरफुल प्रयोग सिखाए तो जनता के चेहरे आनंद एवं ऊर्जा से खिल गए। जब उन्होंने ताली बजाओ रोग भगाओ, तलवा घिसो ऊर्जा जगाओ और हँसो-मुस्कुराओ, सुस्ती हटाओ के प्रयोग करवाए तो पूरा पांडाल तालियों की गडगड़ाहट एवं हँसी की आवाजों से गुंजायमान हो उठा। योग का सैद्धांतिक प्रशिक्षण देते हुए संत चन्द्रप्रभ ने कहा कि योग न तो कोई पंथ है, न कोई परम्परा। यह तो विशुद्ध रूप से जीवन जीने की कला है। अधिक स्वस्थ, अधिक स्फूर्त एवं अधिक ऊर्जावान जीवन जीने के लिए योग कीमिया टॉनिक है। नियमित योग करने से न केवल रोग कटते हैं वरन् उन पर
काफी हद तक नियंत्रण हो जाता है। जो व्यक्ति प्रतिदिन बीस मिनट योगासन, दस मिनट प्राणायाम, बीस मिनट ध्यान और दस मिनट प्रार्थना करता है वह तन-मन और आत्मा तीनों से सदा दुरुस्त और तंदुरुस्त रहता है। स्वस्थ रहने के बताएँ पाँच चरण-संतप्रवर ने कहा कि आज दुनिया में हर दस व्यक्तियों में आठ व्यक्ति अस्वस्थ है। कोई केंसर, डायबिटिज, हाई-लो
ब्लडप्रेशर, हार्ट हटैक, मोटापे से परेशान है तो कोई घुटनों के दर्द, कमरदर्द, कमजोरी से ग्रस्त है। बीमार होने के मुख्य कारण हैं -
असंतुलित-अति एवं अशुद्ध खानपान, प्रदूषण, दुव्र्यसन, बदलता वातावरण, योग न करना, मानसिक तनाव आदि। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के पांच चरण हैं - संतुलित व्यायाम, संतुलित प्राणायाम, संतुलित ध्यान, संतुलित भोजन और
संतुलित नींद। व्यायाम से जड़ता दूर होती है और स्फूर्ति आती है।


प्राणायाम से प्राण ऊर्जा एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आत्मविश्वास में अभिवृद्धि होती है। ध्यान मानसिक शांति और दैवीय गुणों का विकास करता है। सात्विक भोजन से सतोगुणों में वृद्धि होती है एवं नींद शरीर और दिमाग की बैटरी को चार्ज रखती है। पंचतत्त्वों में संतुलन साधें रू संतश्री ने कहा कि शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश इन पांच तत्त्वों से मिलकर बना है। इन पांच तत्त्वों के संतुलन का नाम ही स्वास्थ्य है। पेड़ू के नीचे पृथ्वी तत्त्व, पेड़ू में जल तत्त्व, पेट में अग्नि तत्त्व, फेफड़ों में वायु तत्त्व और मस्तिष्क में आकाश तत्त्व मुख्य रूप से व्याप्त रहता है। पंचतत्त्वों की प्राप्ति
के  स्रोत बताते हुए संतश्री ने कहा कि व्यक्ति हरी घास पर सुबह-सुबह नंगे पैर चले, पोषकता युक्त भोजन ले, हमेशा स्नान करे, कम-से-कम रोज 8-10 गिलास पानी पिएं, सूर्य की धूप का सेवन करे और गहरे-लम्बे श्वास ले। तीन थैरेपी से गूंजा पांडाल रू संतप्रवर ने योग का प्रशिक्षण देते हुए लोगों को सर्वप्रथम ताल वादन, तलवा घिसना एवं खूब खुलकर हँसने की तीन
थैरेपी सिखाई। संतप्रवर ने कहा कि जो एक मिनट तक पूरी ताकत से ताली बजाता है। उसके पूरे शरीर का अपने आप एक्यूप्रेशर हो जाता है। दोनों तलवों को 30-30 बार रगडने से ऊर्जा जाग्रत होती है एवं चेहरा चमक जाता है और एक मिनट तक खुलकर हँसने-मुस्कुराने से दिमाग की सारी चिंताएं, तनाव दूर हो जाते हैं।


सक्रिय योग के सात चरणों का दिया प्रशिक्षण रू संतप्रवर ने सक्रिय योग के सात चरणों का प्रशिक्षण देते हुए कहा कि हमें प्रतिदिन एक-एक मिनट के ये सात चरण सम्पन्न कर लेने चाहिए - परेड, कदमताल अर्थात् अपने ही स्थान पर एक मिनट तक दौडना, पीटी, रस्सीकूदना, हाथों को राइट से लेफ्ट घुमाना, कमर की गोल घुमाई करना एवं नृत्य करना। इन प्रयोगों से मात्र 7 मिनट में पूरा शरीर चार्ज हो जाता है और शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी समाप्त हो जाती
है।


प्राणायाम के पाँच चरण सिखाए रू इस अवसर पर संतप्रवर ने प्राणऊर्जा की अभिवृद्धि, चिंता-तनाव मुक्ति एवं मस्तिष्क की शक्ति को प्रखर बनाने के लिए पेट शुद्धि, हृदय शुद्धि, मस्तिष्क शुद्धि, कंठ शुद्धि एवं नाड़ी शुद्धि प्राणायाम के पाँच चरण सभी श्रद्धालुओं को सिखाए। समारोह में लाभार्थी परिवार छगनलालजी, चंपालालजी, बाबूलालजी,किरणकुमारजभंसाली,श्रीमती मंजुजी पोकरणा, श्रीमती सुमन सोनी, श्री मोटमलजी सदानी,श्री गौतमजी चैपड़ा, श्री जवेरीलालजी गुलेच्छा ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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