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नशा करता है जीवन की खुशियों का नाश- संत ललितप्रभ प्रवचन सुनकर लोगों की हिली आत्मा, मंच पर आकर किया दुव्र्यसनों का आजीवन त्याग

बैंगलोर

23 Jul 2017

कौने से कौने तक खचाखच भरा मैदान...प्रवचन श्रवण करते हजारों युवा...राष्ट्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज का कैसे हटाएँ जीवन से दुव्र्यसन पर दिल-दिमाग को झकझोरने वाला संबोधन...प्रवचन सुनते-सुनते लोगों की हिली आत्मा...मंच पर पहुँचे लोग...नशे के पाउच फाड़ फैंके...आजीवन नशा मुक्त जीवन जीने का लिया संकल्प...पतियों ने पत्नियों को दिया उपहार - आज से नहीं करेंगे किसी भी तरह का नशा...सुनकर महिलाओं की आँखों में आया पानी और संत से कहा - जीवन भर रहेंगे आपके ऋणी...आप आए, सबका जीवन बदल गया...यह नजारा था रविवार को शहर के मराठा हॉस्टल मैदान
में।

संत ललितप्रभ स्वास्थ्य सप्ताह के सातवें दिन दुव्र्यसनों से कैसे पाएँ छुटकारा विषय पर सत्संगप्रेमियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जहाँ एक अच्छी आदत जीवन को ऊँचाइयाँ दिया करती है वहीं एक बुरी आदत अच्छी जिंदगी को बर्बाद कर देती है। आपका एक गलत शौक पूरे परिवार को शोक में डाल सकता है। व्यक्ति भूलचूककर नशा करने की आदत जीवन में न डाले क्योंकि नशा नाश की निशानी है। नशा दांत से लेकर आंत तक, दिल से लेकर दिमाग तक नुकसान ही नुकसान करता है। अगर इन्हें जीते-जी छोड़ देंगे तो हम जीत जाएंगे नहीं तो ये एक दिन मौत बनकर हमें छोड़ देंगे। संतप्रवर ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर कुछ महीने के लिए ही ताजमहल गुटखा खाने वालों के हवाले कर दिया जाए, तो उसे भी लाल किला बनाकर छोड़ देंगे
भीतर के भगवान को न चढ़ाएँ नशा-संतप्रवर ने कहा कि जिनके खान-पान का कोई पता नहीं होता उनके खानदान का भी कोई पता नहीं होता। इंसान मंदिर के भगवान को नशा नहीं चढ़ाता तो फिर भीतर के जीते-जागते भगवान को नशा क्यों
चढ़ा देता है। जब मैं ग्यारह साल की उम्र में संसार को छोड़ सकता हूँ तो क्या आप इक्यावन साल की उम्र में एक बुरी आदत को भी छोड़ नहीं सकते। पाँच साल का बच्चा समझ गया कि नशा करना बुरी बात है लेकिन पचपन साल का प्रौढ़ अभी भी समझ नहीं पाया कि नशा करना बुरी बात है। उन्होंने कहा कि एक महिला शराबी पति की पत्नी बनने की बजाय विधवा बनना ज्यादा पसंद करेगी क्योंकि शराबी के साथ रहने की बजाय विधवा रहने में ज्यादा सुख है। संस्कार के प्रति जागरूक रहिए-अभिभावकों को प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि बच्चों को कार से पहले संस्कार दें। बच्चों को आजादी दें, पर अंकुश भी रखें। उन्हें गलत संगत से बचाकर रखें। शराबी बाप भी अपने बेटे का शराबी बनाना नहीं चाहेगा, पर शराबी दोस्त अपने दोस्त को शराबी बनाकर
ही छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर बच्चे व्यसनों से घिर गए हैं तो हिम्मत करके उन्हें कहें कि वे या तो व्यसन छोड़ें या घर। बिगड़ेल बच्चों के बाप कहलाने की बजाय बिना बच्चों के रहना ज्यादा अच्छा है। अगर आप खुद व्यसन करते हैं तो सावधान! आने वाले कल में आपके बच्चे आपकी बुरी आदतों के चलते आपका नाम लेने में भी शर्म महसूस करेंगे। याद रखें, व्यक्ति की सच्ची दीक्षा उस दिन होती है जिस दिन वह बुरी आदतों का त्याग कर अपने संस्कारों को सुधार लेता है।


संकल्प जगाइए, नशा हटाइए-संतश्री ने कहा कि जिस इज्जत को बनाने में सौ साल लगते हैं, नशे की एक आदत उसे पूरा मटियामेट कर देती है। शुरू में गम को भूलाने वाला नशा बाद में सबसे बड़ा गम बन जाता है। उन्होंने कहा कि गुटखा में से ट हटाइए, बोलिए फिर भी जी करे तो प्रेम से खाइए। दुनिया की सारी चीजें खींचने से लम्बी होती है, पर सिगरेट को खीचों तो...केवल वही छोटी नहीं होती वरन् जिंदगी छोटी होती है। व्यक्ति केवल एक बार इसे बनता हुआ देख ले तो उसे अपने आप नशे से नफरत हो जाएगी। व्यक्ति बुरी सोहबत से बचे, व्यसनों के परिणामों पर चिंतन करे, संकल्प शक्ति जगाए और गुटखा,
सिगरेट, शराब जैसे दुव्र्यसनों को हमेशा के लिए लाइफ से गेट आउट कर दे। जब संतप्रवर ने झोली फैलाकर सत्संगप्रेमियों से दुव्र्यसनों का त्याग करने की गुरुदक्षिणा मांगी तो सैकड़ों युवाओं ने आजीवन नशे के त्याग करने के संकल्प लिए और सभी भाई-बहिनों ने हाथ खड़े कर नशे से सदा दूर रहने का मानस मनाया। इस अवसर पर संतप्रवर ने हम सबका एक ही संदेश रू व्यसन मुक्त हो सारा देश का नारा दिया। समारोह में लाभार्थी परिवार श्री गिरधारीलालजी, बाबूलालजी, अशोककुमारजी
महावीरजी मेहता लुंकड, श्री एफ.आर. सिंघवी, श्री किरोड़ीमलजी तातेड़, श्री सोहनलालजी लुणावत, श्री विकासजी खटोड़ ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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