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रामायण से सीखें परिवार में जीने की कला - संत चन्द्रप्रभ

बैंगलोर

28 Jul 2017

 

 महान दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि घर-परिवार में रहने की कला राम से सीखें, जीवन में उन्नति के द्वार खोलने
का पाठ कृष्ण से सीखें, साधना और संसार के बीच संतुलन साधने की मार्ग बुद्ध से सीखेें और जीवन में मुक्ति पाने का रास्ता महावीर से सीखें। राम जीवन की नींव है तो महावीर जीवन का अंतिम शिखर। राम का मतलब है - माता-पिता के प्रति समर्पण, भाइयों के प्रति अटूट प्रेम, अपनों के प्रति बड़प्पन, मर्यादा की सीख और परायों के प्रति सहानुभूति। जिसके जीवन में
राम और रामायण का त्याग आ गया वह धर्म के हर पथ को जीने का उत्तराधिकारी बन गया।

संत चन्द्रप्रभ शुक्रवार को मराठा हॉस्टल मैदान में रामायण से सीखें घर को स्वर्ग बनाना विषय पर जनमानस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम और रावण अच्छाई और बुराई के प्रतीक हैं। दोनों की राशि एक ही है, पर जीने का ढ़ंग अलग-अलग होने के कारण राम दुनिया में पूजे जाते हैं और रावण का पुतला फूंका जाता है। दुनिया में किसी का भी नाम रावण, कंश, मंथरा या शकुनी नहीं होता, पर इन सबकी आंशिक कमियाँ हम सब के भीतर होती है। हमारा सुन्दर नाम इसलिए रखा जाता है ताकि इंसान नाम के अनुरुप अपना जीवन सुन्दर बना सके। उन्होने कहा कि रामायण और महाभारत दोनों ही भाई-भाई की कहानी
है, पर रामायण त्याग की कहानी है और महाभारत स्वार्थ की। रामायण में भाई-भाई की एकता, धर्म और मर्यादा, एक-दूजे के प्रति त्याग की भावना है वहीं महाभारत में स्वार्थ, टकराव, बिखराव, नारी का अपमान और राज-पाट पाने की लड़ाइयाँ है। महाभारत काला अध्याय है, तो रामायण स्वर्णिम अध्याय। उन्होंने कहा कि हम सब को रामायण से माता-पिता की सेवा और सम्मान की सीख लेनी चाहिए। राष्ट्र-संत ने कहा कि हम दोनों भाईयों ने तो संत जीवन ही माता-पिता की सेवा के लिए स्वीकार किया है। राम का जीवन जीता-जागता उपदेश - संतप्रवर ने कहा कि धरती के और महापुरुषों ने तो उपदेश भी दिए, पर राम का तो जीवन ही जीता-जागता उपदेश था। उन्होंने सीता को दिए एक पत्नी व्रत के वचन को जीवनभर निभाया। अश्वमेध यज्ञ में सीता की स्वर्णमूर्ति बिठा दी, पर अपने वचन पर अडिग रहे। युद्ध के दौरान जब इन्द्रजीत का शव सामने आया तो यह कहते हुए उस पर अपना उत्तरीय वस्त्र ओढ़ा दिया कि इन्द्रजीत महान था जिसने अपने पिता के लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर दी। हम राम से सहजता का गुण सीखें। राज्याभिषेक की जगह वनाभिषेक हो गया फिर भी उनके चेहरे पर शिकन तक न आई।
वनवास के दौरान घटी हर घटना में राम सहज रहे। रावण से युद्ध लड़ा तो भी सहजता पूर्वक। हम हर परिस्थिति में धैर्य और सहजता को ले आएँ तो जीवन राममय हो जाए।

मंथरा जैसे स्वार्थी लोगों से दूर रहें-रामायण की पहली सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि हम मंथरा जैसे स्वार्थी लोगों से दूर रहें अन्यथा हमारे घर की हालत भी रघुकुल जैसी हो जाएगी। जहाँ तक हो सके रिश्तों में स्वार्थ को न लाएँ। चार दिनों का जीना है, सब यहीं छोड़-छाड़ के जाना है, न अपने बाप-दादे साथ में ले गए न अपन ले जाएँगे फिर स्वार्थ में उलझकर क्यों घर को नरक बनाया जाए। स्वार्थ की लकीरें इंसानों के बीच दीवारें खड़ी करने का काम करती है। उन्होंने कहा कि हर कोई घर में रामायण रखे,
प्रतिदिन उसकी कुछ चैपाइयों का संगान करे ताकि हमारे घर में राम और रामराज्य साकार हो सके। भाई होकर भाई के काम आएँ-रामायण की दूसरी सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि जो भाई होकर भाई के काम न आया उसका भाई होना व्यर्थ है। हम लक्ष्मण से सीखें जिसने भाई की सेवा के लिए वनवास का मार्ग तक स्वीकार कर लिया और वनवास में राम-सीता की इतनी सेवा की कि सौ जन्मों तक उस कर्ज को उतारा नहीं जा सकता। हम भरत से सीखें जिसने बड़े भाई के लिए राजमहल तक का त्याग
कर दिया, चरणपादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर राज्य संचालन करने लगे, पर्ण कुटीर में रहने लगे और जमीन से भी डेढ़ फुट नीचे सोने लग गए। हम राम-लक्ष्मण-भरत जैसे भाई बनें जो अपने भाई के लिए सब कुछ कुर्बान करने
को तैयार रहे। त्याग भावना अपनाएँ-रामायण की तीसरी सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि हमारे जीवन में त्याग भावना हो। राम खुद खाने से पहले सीता को खिलाते और लक्ष्मण राम को खिलाकर फिर स्वयं खाते। हम भी खिलाकर खाने की भावना रखें। जो औरों को खिलाकर खाता है उसके लिए भोजन भी प्रभु का प्रसाद बन जाता है। कभी पानी पीने की इच्छा हो तो पहले घरवालों को पानी पीने का निवेदन करें फिर खुद पीएँ। मात्र दो मिनट का आपका धैर्य और त्याग-भावना सबके लिए
आदर्श बन जाएगी। समारोह में लाभार्थी परिवार श्री ओटमलजी, कपूरचंदजी छाजेड़, श्री बाबुलालजी, राजेशजी भोजाणी, श्री रमनजी पारख, श्री तनसुखजी गुलेच्छा, श्री पुष्पाजी पारख, श्री विनोदजी मांडोत, श्री चंद्रप्रकाशजी तालेडा ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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