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नवकार मंत्र से सोया भाग्य जगाएँ - संत चन्द्रप्रभ हजारों लोगों ने किया विश्व शांति के लिए नवकार मंत्र का जाप

बैंगलोर

01 Aug 2017

महान दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति के साथ अगर कोई भी व्यक्ति महामंत्र नवकार का जाप करता है तो उसका सोया भाग्य जग जाता है। नवकार मंत्र के जाप से तन के रोग दूर होते हैं, मन निर्मल होता है, आत्मा-परमात्माय हो जाती है। यह वह महामंत्र है जिसके जाप से अतीत में कभी सेठ सुदर्शन की सुली भी सोने का
सिंहासन बन गई और श्रीमती के हाथ में आया साँप भी माला बन गया। नवकार मंत्र ब्रह्माण्ड की सिद्ध-बुद्ध शक्तियों से संपर्क साधने का दिव्य मंत्र है। उन्होंने कहा कि यह मंत्र अखिल मानवता का मंत्र है। नवकार मंत्र ने जैन धर्म को एक रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संत चन्द्रप्रभ श्री जिनकुशलसूरि दादावाड़ी ट्रस्ट द्वारा मराठा हॉस्टल मैदान में आयोजित सत्संग महाकुंभ के इकतीसवें दिन नवकार-मंत्र से कैसे पाएँ सुख, शांति, समृद्धि विषय पर जनमानस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने
कहा कि मंत्र भारतीय संस्कृति का आत्मा है और ओम् मंत्रों की आत्मा। सृष्टि का जन्म घर्षण से हुआ और घर्षण से ध्वनि व प्रकाश पैदा हुआ।

प्रकाश से ईश्वरीय शक्ति पैदा हुई और ध्वनि से ओम्। इसलिए ओम सारे मंत्रों का बीजमंत्र है। सारे मंत्र ओम् के विस्तार हैं। एक ओंकार के आह्वान से विश्व की सारी शक्तियों का आह्वान हो जाता है। ओम का अ जहाँ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का और अल्लाह का वाचक है वहीं ओम् का म अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी का और अंतिम पैगम्बर मोहम्मद साहब कापरिचायक है। ओम् के अ उ म में ब्रह्मा, विष्णु और महादेव समाए हैं। एक ओम् बोलने से सारे तीर्थंकरों, अवतारों और पैगम्बरों की वंदना हो जाती है। जो मन को तारे वह है मंत्र-संतप्रवर ने कहा कि जो मन को तारे वह मंत्र है। मंत्र को किसी ताम्र पत्र, भोज पत्र या ताड़ पत्र पर साकार कर दे तो वह यंत्र बन जाता है और मंत्र अंकों से जुड़ जाए तो तंत्र बन जाता है। मंत्र साधना के चार चरण होते हैं - उच्चारण, स्मरण, ध्यान एवं अंतर्लीनता। जैसे हमारे पास बीस मिनट हैं तो हम पाँच मिनट मंत्र का लय और ताल से उच्चारण करें, पाँच मिनट गहरी-लंबी साँस लेते हुए मंत्र का जाप करें, पाँच मिनट मंत्र के स्वरूप का हृदय या ललाट पर ध्यान करें और अंत में पाँच मिनट मंत्र में लीन हो जाएँ। इस तरह किया गया मंत्र-जाप हमें चमत्कारिक परिणाम देगा। उन्होंने कहा कि मंत्र-जाप करते हुए समय और संख्या को देखने से ज्यादा जरूरी है मंत्र का मन से जाप करना। जब मंत्र
के साथ तन, मन, श्वास और बुद्धि जुड़ जाती है तो मंत्र सिद्ध हो जाता है। नवकार मंत्र की बताई सूक्ष्म व्याख्या-संतप्रवर ने नवकार मंत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि यह मंत्र हमें विश्व की पाँच शक्तियाँ अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु से जोड़ता है। इसमें पापों को नष्ट करने और विश्व का मंगल करने की कामना है। नवकार मंत्र में 68 अक्षर है जो कि 68 तीर्थों के परिचायक है अर्थात् एक बार नवकार मंत्र बोलने से हमें अड़सठ तीर्थों की यात्रा का पुण्य मिल जाता है। उन्होंने कहा कि घर-दुकान में कोई वास्तुदोष हो तो तोड़-फोड़ करने की बजाय बीचोबीच नवकार मंत्र का पट्ट लगा दें, वास्तुदोष खतम हो जाएगा। अगर भूत-प्रेत या ऊपरी बाधा हो तो कागज पर लिखे नवकार मंत्र का ताबीज सीधे हाथ पर बाँध दें, बाधा दूर हो जाएगी।
जी मचलने लगे या तन में व्याधि हो जाए तो गंगाजल कटोरी में लेकर तीन बार नवकार मंत्र पढ़ें और वह पानी पी लें, थोड़ी देर में ही शांति एवं सुकून मिल जाएगा।

मंत्र-जाप के बताए 21 लाभ-संतप्रवर ने मंत्र-जाप के 21 लाभ बताते हुए कहा कि हमें प्रतिदिन 24 घंटों में 24 मिनट नवकार मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इतना न हो सके तो कम-से-कम तीन बार तो इनका स्मरण हो ही जाए। मंत्र-जाप से जीव का उद्धार, सद्गुरु की प्राप्ति, अनिष्ट का निवारण, सद्गुणों का विकास, बंधनों का नाश, भाग्य का उदय होता है साथ ही उन्नति
मिलना, ऋद्धि-सिद्धि  मिलना, कायकष्ट से छुटकारा, सरस्वती एवं लक्ष्मी की कृपा, शत्रुओं से रक्षा, अदृश्य सहायता, सुखी दाम्पत्य, श्रेष्ठ संतान, पारिवारिक सुख, नवग्रहों में अनुकूलता, ईश्वरीय कृपा, आत्मज्ञान, सद्गति एवं अंत में मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। जैन शब्द की परिभाषा देते हुए कहा कि JAIN शब्द में चार अक्षर हैं। जो हमें इस बात की प्रेरणा देते हैं कि जे से जय जिनेन्द्र बोलो, ए से अहिंसा का पालन करो, आई से इंसानियत की इज्जत करो, और एन से नवकार मंत्रकी आराधना करो। जो इन चार गुणों को अपने जीवन से जोड़ता है, वही JAIN होता है। राष्ट्र-संत ने विभिन्न मुद्राओं का प्रयोग कराते हुए नवका मंत्र के जाप के विशिष्ट प्रयोग करवाएँ।

मंत्र जपो नवकार मनवा...भजन सुनकर झूमे सत्संगप्रेमी-जब संतप्रवर नेमंत्र जपो नवकार मनवा। नव पदों के अडसठ अक्षर, हैं सुख के दातार...भजन सुनाया तो सत्संगप्रेमी खड़े होकर झूमने लगे। दिव्य सत्संग की शुरुआत लाभार्थी परिवार श्री शेषमलजी, अशोककुमारजी गजानन, श्री पुष्पराजजी, दिनेशजीकुमारजी बोहरा, श्री रत्नेशकुमारजी पोकरणा, श्री मोतीलालजी ललवाणी, श्री प्रवीणजी रांका ने दीपप्रज्वलन करकिया।


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