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हर वातावरण में सहज रहना ही ऑर्ट ऑफ लाइफ है- संत चन्द्रप्रभ

बैंगलोर

09 Aug 2017

राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ सागर महाराज ने कहा कि जीवन में परिस्थिति का अनुकूल और प्रतिकूल होना पार्ट ऑफ लाइफ है लेकिन दोनों ही परिस्थिति में अपने मन को शांत और सहज रखना आर्ट ऑफ लाइफ है। जो व्यक्ति हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश -अपयश हर परिस्थति में सहजता से जी सकता है वह व्यक्ति आध्यात्मिक ऊँचाइयाँ हासिल कर सकता है। जीवन में जो सहज मिल जाए वह दूध है, जो माँगने से मिले वह पानी है, पर जिसमें खींच तान होती रहे वह कार्य तो सदा त्याज्य होता है।

संत चन्द्रप्रभ बुधवार को मराठा हॉस्टल मैदान में अध्यात्म सप्ताह के तीसरे दिन सहजता को बनाएँ जीवन की साधना विषय पर सत्संगप्रेमियों कोसंबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर हम डुबते हैं तो समन्दर को दोष देते हैं, मंजिल न मिले तो किस्मत को दोष देते हैं और पाँव को ठोकर लगे तो पत्थर को दोष देते हैं जो व्यक्ति अपनी कमजोरियों को जीत कर अपने जीवन के हर कार्य को सजगता पूर्वक करता है, वह डूबने से भी बचा रहता है और ठोकर खाने से भी। जीवन के चार अनिवार्य चरण बताते हुए राष्ट्र-संत ने कहा कि सहजता, सकारात्मकता, सजगता, प्रसन्नता ये जीवन के वे चार सद्गुण हैं जिनसे व्यक्ति संसार में जीते हुए भी आध्यात्मिक मुक्ति का आनंद ले सकता है।

संतप्रवर ने कहा कि सहजता में जीने के लिए सदा एक मंत्र याद रखना चाहिए - तू तेरी सम्हाल, छोड़ सभी जंजाल। यह एक ऐसा मंत्र है जो हमें व्यर्थ की सरपचियों से मुक्त रखेगा। जब-जब किसी प्रकार का तनाव, लोभ, राग-द्वेष, मन में जगे तो स्वयं को प्रेरणा दीजिए जो प्राप्त है, वह प्रर्याप्त है। भगवान ने जो दिया है, हमें हमारे भाग्य से ज्यादा दिया है। जो भाग्य में वह भाग कर आता है और जो भाग्य में नहीं वो आकर भी भाग जाता है। संतश्री ने कहा कि जीवन में मस्त रहना है तो हर व्यक्ति वस्तु, स्वाद और परिस्थिति को सहजता से लेना होगा। घर में ज्यादा टोका-टोकी न करें, जिसको जो अच्छा लगे उसे करने दें, जब जो हो जाएँ उसका स्वागत करें और जीवन में किसी भी कार्य का लोड न लें। होने वाला होगा अपने रोके रुकेगा नहीं और अपने किये सब कुछ होगा नहीं। इसलिए हर हाल में प्रसन्न और आनंदित रहें। दिव्य सत्संग का शुभारम्भ लाभार्थी परिवार श्री अशोककुमारजी, महेन्द्रकुमार जी रांका, श्री प्रफुल्लजी कोठारी श्री दीपकसिंह जी, श्री कुशलजी गुलेच्छा, श्रीमती शांतिदेवी चैपड़ा, श्री निखिल गुलेच्छा ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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