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महावीर सम्पूर्ण मानवता के भगवान हैं: संत ललितप्रभ

बैंगलोर

10 Aug 2017

महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि भगवानमहावीर केवल जैनों के नहीं वरन सम्पूर्ण मानवता के भगवान हैं। महावीर उन्हीं लोगों के काम के हैं जो ज्योर्तिमयता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने जितनी साधना की और उपसर्ग सहन किए वैसा आज तक कोई भी न कर पाया। वे नारी जाति के लिए वरदान बनकर आए। उन्होंने नारी को बिक्री की वस्तु से
हटाकर श्रद्धा की मूर्ति का स्थान दिलवाया। अगर उनके अहिंसा, अनेकांत, समता, समानता, सहयोग जैसे संदेशों को विश्वभर में फैला दिया जाए तो विश्व मैत्री और विश्व शांति का सपना शीघ्र साकार हो सकता है। संत ललितप्रभ मराठा हॉस्टल मैदान में महावीर से सीखें जीवन के 5 नियम विषय पर जनता को प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जहाँ राम दिए हुए वचन
को निभाने के लिए प्रेरणा स्तंभ हैं वहीं महावीर लिए हुए संकल्प पर दृढ़ रहने के आदर्श स्तंभ हैं। महावीर का म महान बनने, ह हिम्मत रखने, व वचन निभाने और र जीवों पर रहम करने का पाठ सिखाता है। उन्होंने कहा कि सिकन्दर बनकर दुनिया को जीतना सरल है, पर उसी सिकन्दर के लिए स्वयं को जितना मुश्किल है। जो स्वयं को जीतते हैं वही एक दिन महावीर बनते हैं।
जैसे राम ने रावण का और कृष्ण ने कंस का संहार किया वैसे ही महावीर ने क्रोध और कषाय के कंस का एवं राग और द्वेष के रावण का अंत कर सदा-सदा के लिए नमो अरिहंताणम््य बन गए।

भारत के प्राण हैं महावीर रू संत श्री ने कहा कि महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं, पर भगवान महावीर भारत के प्राण हैं क्योंकि गांधी ने महावीर द्वारा प्रदत अहिंसा के अस्त्र से ही भारत को आजादी दिलवाई थी। उन्होंने कहा कि महावीर के संदेश तब भी उपयोगी थे आज भी उपयोगी हैं और सदा उपयोगी बने रहेंगे। वे कभी आउट ऑफ डेट नहीं होंगे। सदा अप-टू-डेट बने
रहेंगे। उन्होंने महावीर के अनुयायियों से कहा कि नेता को वोट, अमीर को नोट, और आगे बढने वालों को सपोट चाहिए, पर महावीर को केवल आपकी खोट चाहिए, ताकि वे आपको खरा बना सकें। महावीर को भीड़ नहीं, भाव चाहिए, सिक्के नहीं, श्रद्धा चाहिए। उन्हें मंदिर में नहीं, मन में बिठाए। वैभव का तो वे त्याग करके आए थे इसलिए उन्हें वैभव चढ़ाने की बजाय अपनी बुरी
आदतें चढ़ाए ताकि आपका जीवन निर्मल और पवित्र बन सके। संतश्री ने कहा कि सुख पाने का एक ही मंत्र है दूसरों को दुःख देना बंद करो। खुद भी सुख से जियो और औरों के लिए भी सुख से जीने की व्यवस्था करो। जो तुम अपने लिए चाहते हो वही दूसरों के लिए चाहो। आपकी बेटी ससुराल में सुखी रहे तो जरूरी है आप अपनी बहू को सुखी रखो और आपकी भाभी पीहर में माँ का ध्यान रखे तो जरूरी है आप अपनी सास का ध्यान रखें। अहिंसा को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि जहाँ अहिंसा इंसान को भगवान बनाती है वहीं हिंसा इंसान को शैतान। व्यक्ति पर दो पर अहिंसा के अहिंसा के संदेश लिखने की बजाय जीवन में अहिंसा लाए। हाथों में अहिंसा के बैनर रखना और पांवों में चमड़े के जूते पहनना कौन-सा धर्म है? संतश्री ने मांसाहार का त्याग करने करवाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जानवर बेजुबान तो होते हैं, पर बेजान नहीं। अगर हमारे शरीर में केवल पिन चुभ जाए तो हम कराह उठते हैं, सोचो जिन जीवों पर कटार चलती है उन्हें कितनी पीड़ा होती होगी? जो एक मांसाहारी को प्रेरणा देकर शाकाहारी बनाता है उसे मंदिर बनाने जितना पुण्य मिल जाता है।

हर कार्य विवेक पूर्वक करें रू महावीर की अहिंसा को प्रेक्किल लाइफ सेजोडने की सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि अगर आप बाइक से सड़क पार कर रहे हों और सामने कीड़े चलते हुए दिखाई दे दे तो बाइक को रोकना, कीड़ों को रूमाल से हटाना और फिर आगे बढना ऐसा करके आप तीर्थ यात्रा का सौभाग्य प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने कहा कि महावीर की अहिंसा को मंदिर से किचन
में ले आएं। चूल्हा जलाने से पहले, बेसन में पानी गिराने से पहले, चावल भिगोने से पहले, नहाने से पहले, यहाँ तक डब्लूसी में बैठने से पहले भी एक बार देख लें कहीं जीव तो नहीं आए हुए हैं। पहले उन्हें हटाएं, बचाएं फिर दूसरा काम करें। भगवान महावीर पूजा से ज्यादा आप द्वारा इस तरह किये गए विवेक पूर्वक कार्य से ज्यादा खुश होंगे। महावीरमय हुई सत्संग सभा रू जब संतप्रवर ने प्रवचन के दौरान करें महावीर को वंदन, ज्ञान का ले दीप कर लें शील कर चंदन..., जय बोलो महावीर स्वामी की घट-घट के अंतर्यामी की...., खुद जियो सबको जीने दो, यही मंत्र अपनाना है, इसी मंत्र से विश्व शांति का घर-घर दीप जलाना है.... भजन सुनाए तो पूरी सत्संग सभा महावीरमय हो गई। दिव्य सत्संग का शुभारम्भ लाभार्थी परिवार श्री चंपालालजी,
 


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