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दस हजारों लोगों ने एक साथ किया मराठा हॉस्टल मैदान में सरस्वती महापूजन सन्मति और सद्गति की करें माँ से प्रार्थना: संत चन्द्रप्रभ

बैंगलोर

13 Aug 2017

राष्ट्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज, राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ महाराज और मुनि शांतिप्रियसागर महाराज के सान्निध्य में रविवार को मराठा हॉस्टल मैदान के विशाल पांडाल में श्री जिन कुशलसूरि जैन दादावाड़ी ट्रस्ट द्वारा आयोजित छप्पन दिवसीय प्रवचनमाला के दौरान महामंगलकारी सरस्वती महापूजन का आयोजन किया गया जिसमें दस हजार श्रद्धालु भाई-बहिनों ने पूजा के वस्त्रों में सरस्वती माँ की प्रतिमा का अष्टप्रकारी पूजन कर ज्ञान और बुद्धि की मंगल प्रार्थना की। सत्संग अध्यक्ष महेन्द्र रांका ने बताया कि मराठा हॉस्टल मैदान में अलसुबह ही हजारों श्रद्धालु पहुँच चुके थे। महापूजन में सर्वप्रथम राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ ने दिव्य मंत्रोच्चार के साथ सरस्वती माँ की साधना करवाई। पश्चात् बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी सत्संगप्रेमियों ने दूध, जल, धूप, चंदन, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य द्वारा माँ का पूजन किया।

समारोह में जब खरतरगच्छ महिला मंडल, जिन कुशलसूरि महिला मंडल, ज्ञानशाला मंडल की बहिनों ने माँ की भक्ति से जुड़े भजनों की गंगा प्रवाहित की तो पूरा माहौल आनंद-उत्सवमय बन गया। महापूजन की महाआरती का लाभ श्री पुष्पराजजी, राजकुमारजी कोठारी परिवार ने लिया। इस अवसर पर जब युवतियों ने महापूजन में दीपकों के साथ नृत्य किया तो श्रद्धालु आनंद विभोर हो गए। महापूजन के दौरान सभी श्रद्धालुओं को मंत्रित रक्षासूत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर संत चन्द्रप्रभ ने कहा कि हमें ज्ञान के प्रकाश में जीना चाहिए। सभी को प्रतिदिन बीस मिनट ही सही, अच्छी पुस्तकों को पढने की आदत डालनी चाहिए। हर व्यक्ति को अपने घर में एक मिनी लाइब्रेरी जरूर बनानी चाहिए। हमें किसी जरूरतमंद छात्र-छात्रा को पढ़ाई में सहयोग करते हुए उन्हें पुस्तकें  और छात्रवृत्ति देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति लक्ष्मी पुत्र के साथ सरस्वती पुत्र भी बने। अगर जीवन में सद्ज्ञान नहीं होगा और केवल धन होगा तो धन जीवन को गलत मार्ग पर ले जाएगा। जैसे कभी केकेयी की जीभ पर बैठी थोड़ी देर की दुर्बुद्धि ने अयोध्या को नर्क बना डाला था। इसलिए हर व्यक्ति जीवन में प्रभु से एक ही प्रार्थना करे कि जब तक जिऊँ तब तक मति सन्मति रहे और मर जाऊँ तो गति सद्गति हो जाए। इस अवसर पर सत्संगप्रेमियों द्वारा पूजन में समर्पित लगभग ग्याराह सौ किलो चावल, दौ सो किलो केले और मिठाई गरीब व कच्ची बस्तियों में वितरित किए गए।

समारोह की शुरुआत राजेन्द्रकुमारजी, त्रिलोककुमार जी बोथरा परिवार ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।


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