slide3-bg



योग जीवन जीने की कला - श्री चन्द्रप्रभ मंगलवार को होगा श्वेताम्बर एवं दिगम्बर परम्परा के राष्ट्र-संतों का समागम

बैंगलोर

14 Aug 2017

राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ जी ने कहा कि योग जीवन जीने की कला है। योग न कोई पंथ है, न कोई मजहब। यह तो अधिक स्वस्थ,
स्फूर्त और ऊर्जावान होने का विज्ञान है। योग स्वास्थ्य का आधार, मानसिक शांति का सूत्रधार और आध्यात्मिक उन्नति का मुख्य द्वार है। विदेशी लोगों का भारत के प्रति आकर्षित होने का एक कारण योग भी है। आज नहीं तो कल, हरव्यक्ति को योग की शरण में आना ही होगा। संत चन्द्रप्रभ सत्संग प्रेमियों से खचाखच भरे मराठा हॉस्टल मैदान में आयोजित पावरफुल योगा के प्रैक्टिकल प्रयोग करवाने से पूर्व जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति खुद ही अपने सेहत या बीमारी का जनक होता है। रोग आना स्वाभाविक है, पर यदि हम जीवन जीने के तौर-तरीकों को बदल लें, तो वापस सुखदायी दुनिया में लौटा जा सकता है। अधिकांश रोग जीवन जीने के गलत तरीके से उत्पन होते हैं। जीवन वीणा के तारों की तरह है। हमें इन्हें न तो जरूरत से ज्यादा कसना चाहिए और न ही जरूरत से ज्यादा ढीला छोडना चाहिए। स्वास्थ्य तो संतुलन का ही दूसरा नाम है।

संतप्रवर ने कहा कि जो दवाइयों से खुद को बचाकर रखता है वह बुद्धिमान है, पर जो जीवनशैली को बदलकर खुद को बीमार ही नहीं पडने देता, वह खुद एक चिकित्सक होता है। प्रकृति ने हमें ठीक होने के लिए भरपूर ताकत दी है। पानी, ताजी हवा, सूरज की रोशनी, नींद और चलने जैसी चीजें मुफ्त में दी हंै। योगाभ्यास की तरह ही चलना और सुबह की सैर करना दुनिया की सबसे अच्छी औषधि है।

राष्ट्र-संत ने कहा कि योग से हमारे शरीर के पंच कोषों पर सकारात्मक प्रवाभ पड़ता है। हमें अपने अन्नमय कोष को स्वस्थ रखने के लिए हितकारी, मितकारी और ऋतु के अनुरूप भोजन करना चाहिए। स्वास्थ्य का मंत्र है – अन्न को करो आधा, सब्जी को करो दुगुना, पानी पियो तिगुना और हँसी को करो चैगुना। हमें प्राणमय कोष को स्वस्थ रखने के लिए लम्बी गहरी साँसों का
अभ्यास करना चाहिए। मनोमय, ज्ञानमय और आनंदमय कोष की स्वस्थता के लिए ध्यान का अभ्यास बेहद लाभप्रद है।

संतश्री ने मानसिक सेहत के लिए चिंता से दूर रहने की खास सलाह दी। उन्होंने कहा कि चिंता के पास समस्या को सुलझाने की ताकत नहीं है। यदि हमारे मन में ईष्या, क्रोध और लालसा नहीं हो तो रोग की परछाई भी हमें नहीं छू सकती। जो व्यक्ति रोजाना सुबह योगासन, प्राणायाम और ध्यान करता है, वह प्रतिदिन अपना कायाकल्प कर लिया करता है। संतप्रवर ने क्लैपिंग, नैल रबिंग, हैंड रबिंग, फुट रबिंग और लाफिंग थैरेपी के खास प्रयोग करवाए। शरीर की जड़ता को दूर करने और ऊर्जा जागरण के लिए पावरफुल योगाभ्यास करवाया गया। सूर्यनमस्कार का भी सभी लोगों ने विशेष अभ्यास किया। नृत्य योग का प्रयोग करके सब ने तन-मन को एकलय और संगीतमय बनाया।

समारोह के अंत में श्रीमती लच्छाबाई का एक सौ पन्द्रह उपवास की सुदीर्घ तपस्या का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मद्रास जैन समाज की ओर सेे गुरुजनों को आगामी चातुर्मास मद्रास में करने की विनती की गई। श्री जयंतिलालजी, पीयुष जी मेहता के द्वारा सिद्धितप के उपलक्ष में कर लो दुनिया मुट्ठी में पुस्तक वितरित की गई।


Event Gallery


Our Lifestyle

Features