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अच्छा रखें स्वभाव, सब पर पड़ेगा प्रभाव - राष्ट्र-संत ललितप्रभ, गुरुवार को आर्ट ऑफ टॉकिंग के पावरफुल स्टेप्स

बैंगलुरु

05 Jul 2017

राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ महाराज ने कहा कि जैसा हमारा स्वभाव होता है वैसा ही दूसरों पर प्रभाव प्रड़ता है। टेढ़े स्वभाव का व्यक्ति जहाँ अपनों के दिल से भी उतर जाता है वहीं मधुर स्वभाव का व्यक्ति दूसरों के दिलों में भी जगह बनाने में सफल हो जाता है। अगर हमारे कारण किसी के आँख में आँसू आते हैं, तो यह गलत है। हमें अपना नेचर इतना अच्छा रखना चाहिए कि हमारे कारण नहीं अपितु हमारे याद में किसी की आँखों आँसू आए। श्री ललितप्रभ महाराज चामराज पेट स्थित मराठा हॉस्टल मैदान में आयोजित सतावन दिवसीय प्रवचनमाला के अंतर्गत चैथे दिन कैसा रखें स्वभाव कि सब पर पड़े प्रभाव विषय पर प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जो भला करने वाले का भी बुरा करे वही शैतान होता है, पर जो बुरा करने वाले का भी भला करे
दुनिया में वही महान इंसान होता है। आदमी का अच्छा स्वभाव ही उसे महान बनाता है। हमें कभी भी किसी की कमियाँ नहीं निकालनी चाहिए। संतप्रवर ने इस आदत को ठीक करने की सलाह देते हुए कहा कि हम इसलिए किसी की कमियाँ न निकालें, क्योंकि कमियाँ हममें भी है और जुबान दूसरों के पास भी है। आखिर दुनिया में दूध का धुला कोई नहीं होता, अगर हम दूसरों की कमिया निकालेंगे तो हम कमजोर हो जाएँगे और अगर दूसरों की विशेषताएँ देखेंगे तो हम विशिष्ट हो जाएँगे।

उन्होंने कहा कि हमें किसी की मजाक भी नहीं उड़ानी चाहिए। इस आदत को ठीक करने की प्रेरणा देते हुए संतप्रवर ने कहा कि हमें हमेशा सम्मान की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। इस दुनिया में इज्जत उसी को मिलती है, जो दूसरों को इज्जत देना जानता है। अगर हम किसी का पानी उतारेंगे तो वो हमारी आरती  नहीं उतारेगा। उन्होंने कहा कि घर में व्यर्थ की टोका-टोकी की आदत नहीं रखनी चाहिए, अगर घर के बुजुर्ग ज्यादा टोका-टोकी बंद कर दें तो माँ-बाप से अलग होने की किसी भी बहु-बेटे की भावना नहीं होगी। उन्होंने कहा कि असली अमीर वह नहीं होता जिसके घर में होता है - खोखा और पेटी, असली अमीर
वह है जिसके घर में खुश रहती है बहु और बेटी।  राष्ट्र-संत ने कहा कि हमें कभी भी किसी को दुखी नहीं करना चाहिए,
क्योंकि दुनिया में हर चीज लौट कर आती है। आज हम जैसे बीज बोते हैं, कल हमें वैसे ही फल मिलते हैं। वह आदमी जीवन में सदा सुखी रहता है जो दूसरों को कभी दुख नहीं देता है। हमें घर, परिवार और समाज में बाग लगाने का काम करना चाहिए आग लगाने का नहीं। जहाँ आपसी मन-मुटाव, वैर-विरोध और स्वार्थ की आग होती है, वहाँ कभी प्रेम और शांति के सुमन नहीं खिल सकते। समारोह शुभारंभ पारसमल सालेचा, बाबुलाल ललवानी, अनिल भड़कतिया, जयपुर के प्रकाश दफ्तरी एवं इंदौर के किशोर बिंदल ने दीपप्रज्वलन कर किया। दीपप्रज्वलन से पूर्व सभी लोगों ने सामूहिकरूप से नवकार मंत्र का पारायण
किया।


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