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कल्पसूत्र का श्रवण भागवत की तरह महामंगलकारी - संत ललितप्रभ, केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार ने लिया गुुरुजनों से आशीर्वाद

बैंगलोर

20 Aug 2017

पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर रविवार को महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज, दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज और मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के सान्निध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ कल्पसूत्र और अंतगड़दशांग आगमों की भव्य शोभायात्रा दादावाड़ी से मराठा होस्टल मैदान तक निकाली गई जो मैदान पहँुचने पर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। सत्संगपे्रमियों द्वारा जयकारों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया बया। श्रुत लाभार्थी पन्नालाल पुखराज कवाड़ परिवार ने गुरुजनों को आगम शास्त्र समर्पित करने का लाभ लिया। इस अवसर पर राष्ट्र-संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि कल्पसूत्र और अंतगड़दशांग आगम ये दोनों शास्त्र श्रीमद्भाग्वत की तरह महामंगलकारी है। इनका भावभक्ति पूर्वक श्रवण करने से व्यक्ति की सातों नरक टल जाती है और वह शीघ्र ही शांति, सिद्धि और मुक्ति को प्राप्त करता है। कल्पसूत्र का विवेचन करते हुए संतश्री ने कहा कि पर्युषण पर्व में हमें गरिष्ठ भोजन का त्याग, पंचव्रतों का पालन, अनावश्यक परिग्रह पर अंकुश, पापों का पायश्चित, आत्मचिंतन, विनम्रता-क्षमा को धारणकर और अंतिम तीन दिन उपवास कर संवत्सरी का प्रतिक्रमण करना चाहिए।

महिलाएं पुरानी साडियों का करें त्याग-संतश्री ने कहा कि आप संत नहीं बन सकते तो क्या हुआ, पर परिग्रह पर अंकुश तो लगा ही सक ते हैं ना। आजकल हर संपन्न महिला के पास कम से कम दौ सौ साडियाँ मिल जाएगी फिर भी वे नई साडियाँ खरीदती रहती हैं, पर कोई महिला एक साथ दो साडियाँ पहनकर घूम सकती है क्या? फिर इन्हें इकठ्ठा करने की आसक्ति क्यों रखी जाए। चुटकी लेते हुए संतश्री ने कहा कि हर महिला महिने में एक नई साड़ी जरूर खरीदे यह धर्म होगा जब आप उससे पहले कोई पुरानी साड़ी किसी गरीब महिला को दान में देने का सौभाग्य ले  लेंगे इससे आपके तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, पर उस गरीबमहिला के बहुत बड़ा फर्क  पड़ जाएगा। दिव्य सत्संग का शुभारम्भ केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार, संघवी कुशलराज गुलेछा, पुलिस इंस्पेक्टर जोसफ ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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