slide3-bg



हर व्यक्ति बने जीवन का इंजीनियर: संत ललितप्रभ

बैंगलोर

13 Jul 2017

राष्ट्र्र-संत श्री ललितप्रभ ने कहा कि हमार जीवन हमें प्रकृति का अनमोल उपहार है। अगर जीवन को सही तरीके से जीना आ जाए, तो जैसे बाँस में से बाँसुरी पैदा की जा सकती है, मिट्टी में से मंगल कलश बन सकता है और पत्थर में से प्रतिमा को साकार किया जा सकता है ऐसे ही जीवन को महानता की ओर ले जाया जा सकता है। हर व्यक्ति को जीवन का इंजीनियर बनना चाहिए। अगर जीवन में किसी भी प्रकार की खोट आ भी जाएँ, तो भी जैसे एक इंजीनियर खराब मशीन को ठीक करता है, वैसे ही हम अपने जीवन में पनप गई गलत वृत्तियों को ठीक करके एक निर्मल और पवित्र जीवन का मालिक बन सकते हैं। श्री ललितप्रभ यहाँ श्रद्धालुओं से खचाखच भरे मराठा हॉस्टल मैदान में खुद को बनाएँ जीवन का इंजीनियर विषय पर जनमानस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूर्योदय से पहले जगने की आदत डालनी चाहिए, सुबह जल्दी जगने वाले महानुभाव उगते हुए भाग्य के सूर्य का दर्शन करते हैं, जबकि देर तक सोने वाले लोग हमेशा डूबते हुए सूरज को ही देख पाते हैं। सुबह 5.30
बजे उठना और रात को 10.30 बजे सोना आरोग्य, बुद्धि, धनार्जन और भाग्योदय के लिए रामबाण दवा है। उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन 1 घंटा स्वास्थ्य के लिए भी प्रदान करना चाहिए। शारीरिक स्फूर्ति के लिए 20 मिनट गति से टहलना चाहिए, प्राणऊर्जा को बढ़ाने के लिए 20 मिनट योग और प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए तथा मानसिक शान्ति और आध्यात्मिक चेतना के विकास के लिए 20 मिनट ध्यान और प्रार्थना करनी चाहिए।

राष्ट्र-संत ने कहा कि हर सुबह की शुरुआत मुस्कान और प्रणाम से करनी चाहिए। सुबह आँख खुलते ही हमें 1 मिनट तकतबियत से मुस्कुरा लेना चाहिए और बड़े -बुजुर्गों को प्रणाम करने का सौभाग्य प्राप्त कर लेना चाहिए ताकि आपका पूरा दिन उनके आशीर्वाद की बदौलत सुकून भरा रहे। स्वावलंबी जीवन का पाठ पढ़ाते हुए संत प्रवर ने कहा कि अपने छोट-मोटे काम खुद संपादित करने चाहिए, चाहे झूठी थाली हो या खुद के मैले कपड़े। अगर हम खुद इन्हे धोएँगे तो स्वावलंबी जीवन का श्रीगणेश हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नाखून बढ़ जाने पर उन्हें अवश्य काट लेना चाहिए। भोजन सदा ताजा और सात्विक लेना चाहिए।
बासी भोजन रोग और आलस्य को बढ़ाने वाला होता है। सात्विक, सीमित, ऋतु के अनुकूल भोजन करने वाला अपना चिकित्सक खुद होता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि हमें पहनावा भी शालीनतम रखना चाहिए। ऐसा पहनावा पहनने से बचना
चाहिए जिससे दूसरों की दृष्टि हमारे प्रति दूषित हो। यदि युवक व्यसन में फँस जाएंगे और युवतियाँ फैशन में अटक जाएंगी तो सारे परिवार वाले टेंशन में आ जाएँगे।

संतप्रवर ने कहा कि अपने चेहरे पर सदा गुलाब के फूल जैसी खिलावट और मुस्कुराहट रखनी चाहिए आपकी मुस्कुराहट आस-पास के वातावरण को खुशहाल और पॉजिटीव बना सके। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें जो जीवन दिया है, इसे सदा बेहतर बनाएँ, मन ऐसा रखें, जो किसी का बुरा न सोचें, दिल ऐसा रखें जो किसी को दुखी न करे और रिश्ता ऐसा बनाएँ जिसमें सदा मिठास घुली रहे। समारोह का शुभारम्भ श्रीमती पानीबाई-मीठालाल भंसाली, रमनलाल, अमितकुमार पारख, बाबुलाल पारिक, जीवराज लोढ़ा ने दीपप्रज्वलन कर किया।


Event Gallery


Our Lifestyle

Features