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श्वास जितना जरूरी है आत्म विश्वास: संत चन्द्रप्रभ

बैंगलोर

14 Jul 2017

राष्ट्र्र-संत श्री चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि जीवन जीने के लिए सांस की जरूरत है, पर जीवन का विकास के लिए आत्म-विश्वास की जरूरत है। आत्मविश्वास के बलबूते व्यक्ति विश्व विजय भी प्राप्त कर सकता है और आत्म विजेता भी बन सकता है। जिंदगी में सब कुछ हम पर निर्भर है अगर हम मान लें तो हार है, पर ठान लें तो जीत है। मजबूत शरीर पर कमजोर मन
वाला व्यक्ति पीछे रह जाएगा, पर कमजोर शरीर में भी मजबूत मन वाला व्यक्ति बाजी मार जाएगा। श्री चन्द्रप्रभ यहाँ श्रद्धालुओं से खचाखच भरे मराठा हॉस्टल मैदान में आत्म-विश्वास की कमी को कैसे करें दूर विषय पर जनमानस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्म विश्वास से व्यक्ति सफलता के आसमान को छू सकता है। जब व्यक्ति अपने भीतर कुछ बनने का जुनून जगा लेता है, तो एक अपाहिज, विकलांग और कमजोर व्यक्ति भी सफलता का आसमान छू लेता है। जो व्यक्ति अपनी जिंदगी को एक चुनौती के रूप में लेता है, वह व्यक्ति अपने जीवन का परिणाम निकाल लेता है। उन्होंने कहा कि हमें सफल होने के लिए अपनी 100 प्रतिशत ताकत को लगाना होगा, कर्मयोग को जगाना होगा, कटिबद्ध होकर चलना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि बारखड़ी में पहले क आता है फिर ख। क हमें कहता पहले कर्म करो और ख कहता है फिर खाओ।

संतश्री ने कहा कि हम दिमाग को सकारात्मक कार्यों में लगाए। खाली दिमाग शैतान का घर होता है पर खुला दिमाग भगवान का घर बन जाता है। ईश्वर जब भी हमारे जीवन के विकास के लिए हमारे भीतर अवतार लेता है, तो वह आत्म विश्वास के रूप में हमारे भीतर प्रकट होता है। उन्होंने कहा जब कोई लोहे के व्यवसाय में देश का टाटा बन सकता है और जूतों के व्यवसाय में देश में बाटा बन सकता है, तो हम भी आत्म विश्वास के साथ अपने कदम आगे बढ़ाएँ और जीवन में प्रगति के नये द्वार खोलें। अगर हम असम्भव में से अ हटा देते हैं तो जीवन का हर काम सम्भव हो जाएगा। राष्ट्र-संत ने वयोवृद्ध लोगों को सलाह देते हुए कहा कि तन से भी ज्यादा हमारे भीतर मन की बिमारियाँ हो जाती हैं। हम शरीर से बाद में बुढ़े होते हैं मन से पहले बुढ़े हो जाते हैं। हम बुढ़ापे को भुनभुनाते हुए नहीं अपितु गुनगुनाते हुए जिएँ ताकि बुढ़ापा अभिशाप बनने की बजाए वरदान बन जाए।
उन्होंने जैन श्रद्धालुओं के द्वारा की जाने वाली बड़ी तपस्या को भी आत्मविश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि कोई बड़ा पहलवान भी आठ उपवास नहीं कर पाएगा, पर श्रद्धा से भरा हुआ दुबली काया वाला मजबूत मन का आदमी 30 उपवास आराम से कर जाएगा। पांडाल में जब सैकड़ों बड़ी तपस्या करने वाले व्यक्ति खड़े हुए तो श्रद्धालुओं ने तालियों की गडगड़ाहट के साथ अभिनंदन किया। संतप्रवर ने पाँच मोटीवेशनल प्रेरणा देते हुए कहा कि  हम अपने आप को हमेशा प्रेरणा दें कि मैं कम और कमजोर नहीं हूँ, मैं श्रेष्ठ हूँ, मैं विजेता हूँ, मैं दुनिया का हर काम कर सकता हूँ। आज का दिन मेरा दिन है द्ध याद रखिए आत्म विश्वास के साथ जीने वाले हर व्यक्ति के साथ ईश्वर का बल होता है और वह सदा विश्वास रखे कि ईश्वर सदा उसके साथ है।

समारोह का शुभारम्भ श्रीमान तेजराज, मनोजकुमार आनंदकुमार मालानी, श्रीमतीउगमदेवी, जेठमल भंसाली, गोपालदास पापली, राधेश्याम अरोड़ा, रमेश टाक, कुमारपाल सिसोदिया महामंत्री गोडवाड़ भवन ट्रस्ट ने दीपप्रज्वलन कर किया।


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