slide3-bg



ऊँचा लक्ष्य ही दे सकता है बड़ी सफलता: संत चन्द्रप्रभ

बैंगलोर

12 Jul 2017

महान दार्र्शनिक राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि सफलता जीवन की सबसे सफल उपलब्धि है, पर यह न तो आसमान से टपकती है, न यह जादुई या रहस्यमयी है। सफलता तो तब मिलती है जब हमारी साँसों में भी सफलता का सपना बस जाता है। सफलता लक्ष्य की ओर किए जाने वाले निरंतर पुरुषार्थ का परिणाम है। अपने जीवन को हम जैसा बनाना चाहते हैं, वैसा बनना ही सफलता है। यह सफलता कैसे हासिल की जाए, जीवन के कुरुक्षेत्र में यह रणनीति तय करना ही हमारी पहली सफलता है।  संत चन्द्रप्रभ सोमवार को मराठा हॉस्टल मैदान में सफलता सप्ताह के तीसरे दिन 100 त्न सफलता रू कैसे करें हासिल विषय पर विशाल जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मंजिलें उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान
होती है। सिर्फ पंख लगने से कुछ नहीं होता, हौसलें हों तो ही उड़ान होतीn है। दुनिया में किसी भी राहगीर को यूँ ही नहीं मिलती मं$िजल, दिल में भी  एक जुनून-सा जगाना पड़ता है। किसी चिडिया से पूछो तो पता चलेगा कि आशियाना बनाने के लिए सैकड़ों बार भरनी पड़ती हैं उड़ानें और तिनका-तिनका उठाना होता है। राष्ट्र-संत ने कहा कि सफलता पाने के लिए मात्र आधा दर्शन चीजें चाहिए। जैसे अच्छी फसल पाने के लिए मिट्टी, बीज, पानी, धूप, खाद और देखभाल चाहिए, वैसे ही सफलता का आनन्द लेने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, कड़ी मेहनत, बेहतर कार्ययोजना, श्रेष्ठ बुद्धिमानी, प्रबल आत्मविश्वास और समय के
समुचित प्रबंधन की जारूरत होती है। विफल से विफल व्यक्ति सफल हो सकता है। इसके लिए एक ही ताकत चाहिए और वह है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास संकट-मोचक हनुमान की तरह है।

संतश्री ने कहा कि किसी गोल्ड मेडलिस्ट छात्र से पूछिए कि टॉप टेन में आने के लिए उसने क्या किया? तो उसका जवाब होगा - गुरुजनों का मार्गदर्शन, खुद की मेहनत, बुलंद हौसले, ऊँचा लक्ष्य, तकनीकी ज्ञान और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के लिए आप भी अपने लक्ष्य तय कीजिए - फिर चाहे वे लक्ष्य भौतिक हों या आध्यात्मिक, शिक्षापरक हों स्वास्थ्यपरक। जिसके पास लक्ष्य नहीं है उसके पास जीवन जीने का न जोश है,न उत्साह। वह जीवन के नाम पर केवल टाइम पास कर रहा है।
राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ ने अपने जीवन का लक्ष्य तय करने की प्रेरणा  देते हुुए कहा कि बगैर लक्ष्य के किया गया मंत्र-जाप, औषधि-निर्माण, ध्यान-साधना और व्यापार हमें किसी डगर तक नहीं पहुँचा सकते। पहले अपना लक्ष्य तय कीजिए। अपने लक्ष्य के लिए आप अपनी जितनी प्रतिशत ता$कत झोंकेंगे, आप उतने प्रतिशत सफल हो पाएँगे। 100ः सफलता के लिए 100ः ऊर्जा लगानी होगी। उन्होंने कहा कि सफलता चाहिए तो पहले एकान्त में बैठकर लक्ष्य साधने वाली योजना बनाइए और उस योजना की क्रियान्विति के लिए खुद को सख्ती से अनुशासित कीजिए। बिना अनुशासन का व्यक्ति बोल तो खूब सकता
है, पर सफलता के सपनों को खोल नहीं सकता। संतप्रवर ने जुनून जगाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पूरी ता$कत से प्रगति की दिशा में धक्का मारिए और जैसे ही गाड़ी चल पड़े - कूदकर चढ़ जाइए। फिर लीजिए जीवन का जी-भर आनंद। पुरानी निराशाओं और उपेक्षाओं को डस्टबीन में डालिए। मन की दराजों को साफ कीजिए। प्रेरणादायक सीडी सुनिए, खुद को ऊर्जावान बनाइए और लम्बे समय से पेंडिंग पड़े कामों को पूरा कर डालिए। प्रवचन समारोह का शुभारम्भ लाभार्थी परिवार मीठालाल, भरतकुमार भंसाली, लालचंद, अशोककुमार गोठी इंदौर के पंकज संघवी, राजेश जैन, जोधपुर के अनिल गर्ग ने दीपप्रज्वलन कर किया।


Event Gallery


Our Lifestyle

Features